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उत्तराखंड में ट्रैफिक नियमों को लेकर सख्ती: पूरे प्रदेश में लागू होगी एकीकृत ANPR कैमरा योजना, हर महीने CS दफ्तर जाएगी चालान रिपोर्ट

उत्तराखंड के मुख्य सचिव  आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंध समिति की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में सड़क सुरक्षा कोष से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश में सुरक्षित यातायात और नियमों के पालन के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।

​1. पूरे प्रदेश के लिए बनेगी एकीकृत ANPR कार्ययोजना

​मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग के सचिव को पूरे राज्य के लिए एएनपीआर (Automated Number Plate Recognition) कैमरों से संबंधित एक व्यापक कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा:

​”परिवहन, पुलिस, राज्य कर और खनन विभाग, इन सभी को एएनपीआर कैमरों के एक्सेस की जरूरत होती है। इसलिए अलग-अलग काम करने के बजाय पूरे प्रदेश के लिए एक एकीकृत (Integrated) कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।”

 

​2. हर महीने मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी जाएगी चालान रिपोर्ट

​यातायात नियमों के उल्लंघन पर की जा रही कार्रवाई की निगरानी के लिए मुख्य सचिव ने एक सख्त व्यवस्था बनाने को कहा है। अब परिवहन और पुलिस विभाग द्वारा किए जाने वाले चालानों की एक संकलित (कंपाइल) रिपोर्ट हर महीने मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने सड़क सुरक्षा कोष की एक वार्षिक कार्ययोजना बनाने पर भी जोर दिया, जिसमें सड़क सुरक्षा के सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

​3. बजट को लेकर स्थिति साफ: रूटीन काम विभागीय बजट से ही होंगे

​बैठक में बजट के सही इस्तेमाल को लेकर मुख्य सचिव ने स्थिति स्पष्ट की:

​रूटीन कार्य: रोड फर्नीचर और साइनेज (Signage) लगाने जैसे रूटीन काम लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा ही किए जाएंगे।
​विभागीय प्राथमिकता: सभी विभाग अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े कामों को अपने तय विभागीय बजट से ही पूरा करने को प्राथमिकता दें।
​सड़क सुरक्षा कोष का उपयोग: इस कोष का इस्तेमाल केवल उन्हीं महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा, जिनके लिए विभागों के पास बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
​4. गड़बड़ी और डुप्लीकेसी रोकने के लिए बनेगी उपसमिति

​मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि किसी भी प्रस्ताव को मुख्य समिति के सामने रखने से पहले उसकी बारीकी से जांच (स्क्रूटिनी) की जानी चाहिए। इसके लिए एक विशेष उपसमिति (Sub-committee) गठित की जाएगी, जो यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी कार्य में दोहराव (डुप्लीकेसी) न हो और बजट का सही इस्तेमाल हो।

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