
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं के स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करती है और चार वर्ष की सेवा के बाद बड़ी संख्या में युवाओं के सामने भविष्य की अनिश्चितता खड़ी हो जाती है।
गणेश गोदियाल ने कहा कि देश के युवा लंबे समय तक सेना में स्थायी भर्ती की तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में भर्ती होने वाला युवा 21-22 वर्ष की उम्र में सेवा से बाहर होने के बाद अपने भविष्य और परिवार की आर्थिक सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने नियमित सैनिकों और अग्निवीरों के बीच सेवा अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा में अंतर का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस का कहना है कि सेना में अनुभव, अनुशासन और विशेषज्ञता लंबे समय की सेवा से विकसित होती है, इसलिए भर्ती नीति पर पुनर्विचार की जरूरत है।
चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है। उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के हजारों परिवार पीढ़ियों से सेना में रोजगार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते आए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्थायी रोजगार चाहिए, चार वर्ष बाद दोबारा रोजगार की तलाश की अनिश्चितता नहीं।
प्रीतम सिंह ने पेंशन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी सरकार से स्पष्ट नीति बताने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि सेवा से बाहर होने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों के लिए दीर्घकालिक रोजगार और पुनर्वास की क्या व्यवस्था है।
चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि केवल विभिन्न विभागों में आरक्षण या प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि अब तक कितने अग्निवीरों को सेवा समाप्त होने के बाद स्थायी सरकारी रोजगार मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सैन्य बहुल राज्य है और सेना की भर्ती को केवल रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने नियमित सेना भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने, रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने और युवाओं को पर्याप्त भर्ती अवसर देने की मांग की। साथ ही सैन्य बहुल राज्य उत्तराखंड के युवाओं के लिए विशेष भर्ती नीति और सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए पुनर्वास पैकेज लागू करने की मांग उठाई गई।
सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने दावा किया कि पहले हर साल करीब 80 हजार युवाओं को सेना में रोजगार मिलता था, जो अब घटकर करीब 47 हजार रह गया है। उन्होंने कहा कि यदि 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नियमित सेवा में लिया जाता है तो लगभग 12 हजार युवा ही स्थायी सेवा में पहुंचेंगे। उन्होंने सरकार से चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं की ठोस व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि अब तक कितने अग्निवीरों को चार वर्ष की सेवा के बाद स्थायी सरकारी रोजगार मिला है, सेना में नियमित भर्ती के रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे और उत्तराखंड के कितने युवाओं को अग्निवीर योजना के तहत भर्ती मिली है।
कांग्रेस ने अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने तथा अग्निवीरों को भविष्य में नियमित सैनिकों के समान सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा देने पर विचार करने की मांग भी रखी।
प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।



