
देहरादून-उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों जबर्दस्त ‘मसाला’ छन रहा है! मामला किसी विपक्षी दल की घेराबंदी का नहीं, बल्कि बीजेपी का आपस में ही ‘कुश्ती’ लड़ने जैसा हो गया है।
हाल ही में बीजेपी दफ्तर में चकराता क्षेत्र से करीब 60 कार्यकर्ताओं की जॉइनिंग का धमाकेदार कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी के भीतर ऐसा ‘ब्रेक’ लगा कि जॉइनिंग की थाली धरी की धरी रह गई और कार्यकर्ताओं को बैरंग वापस लौटना पड़ा!
योजनाओं का ‘बजट-लोचा’ और मंत्रीजी के घर पर प्रदर्शन
असल में, सारा विवाद समाज कल्याण विभाग द्वारा चकराता क्षेत्र के लिए जारी की गई करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं और बजट आवंटन को लेकर शुरू हुआ। चकराता से बीजेपी नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति (SCSP) और जनजाति उप-योजना (TSP) के बजट आवंटन में बीजेपी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। देखते ही देखते कार्यकर्ताओं का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने कैबिनेट मंत्री खजान दास के यमुना कॉलोनी स्थित सरकारी आवास का घेराव कर दिया!
’सुसाइड’ का अल्टीमेटम और सरकारी चिट्ठी का ब्रेक!
मंत्री खजान दास भी चुप नहीं रहे। आरोपों से आहत होकर उन्होंने तीखा पलटवार करते हुए मीडिया में बयान दे दिया कि “यदि मुझ पर लगे भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोप साबित हो जाते हैं, तो मैं न केवल मंत्री पद छोड़ दूंगा बल्कि आत्महत्या भी कर लूंगा!” मंत्रीजी के इस तीखे बयान ने आग में घी का काम कर दिया।
इसी गर्मागर्मी के बीच जनजातीय कल्याण निदेशालय उत्तराखंड से 21 सितम्बर 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। निदेशक एस.एस. टोलिया द्वारा जारी इस पत्र के अनुसार, देहरादून (₹11,42,61,000/-), ऊधम सिंह नगर (₹26,28,000/-) और पिथौरागढ़ (₹23,68,000/-) के लिए जारी अवमुक्त बजट राशि के अग्रिम आवंटन/वितरण पर उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशों के क्रम में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

क्या हैं इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के मायने?
अंदरूनी खींचतान उजागर: चकराता में पार्टी के भीतर चल रही आपसी गुटबाजी अब खुलकर सरेआम आ गई है।
ज्वाइनिंग पर रोक: मंत्री आवास पर हुए हंगामे का सीधा असर बीजेपी मुख्यालय पर भी देखने को मिला, जहाँ 60 लोगों की जॉइनिंग आखिरी मौके पर टल गई।
डैमेज कंट्रोल में जुटे सीएम: बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर मामले की जांच कराने और समीक्षा का आश्वासन दिया है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि शासन स्तर पर बजट आवंटन पर लगाई गई यह रोक पार्टी की अंदरूनी चिंगारी को शांत कर पाती है या आने वाले दिनों में यह ‘सियासी रायता’ और फैलेगा!



