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लंपी बीमारी की रोकथाम को लेकर सरकार गंभीर, 2.10 लाख पशुओं का हुआ टीकाकरण

देहरादून। उत्तराखंड में पशुओं में फैल रहे लंपी स्किन डिजीज (LSD) की रोकथाम को लेकर मंगलवार को पशुपालन मंत्री की अध्यक्षता में यमुना कॉलोनी स्थित कैंप कार्यालय में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में बीमारी की स्थिति, टीकाकरण और पशुओं के उपचार की समीक्षा की गई।
पशुपालन विभाग के निदेशक ने बताया कि प्रदेश में लंपी बीमारी का पहला संदिग्ध मामला 21 जून 2026 को हल्द्वानी में सामने आया था। इसके बाद विभाग ने बीमारी की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण और जागरूकता अभियान चलाया।
अब तक प्रदेश में 2 लाख 10 हजार 89 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अलावा 24 स्थानों पर 3 किलोमीटर की परिधि में रिंग वैक्सीनेशन किया गया, जिसमें 28 हजार 243 टीके लगाए गए। इस वर्ष अब तक कुल 11 लाख 41 हजार 519 टीके लगाए जा चुके हैं।
पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी देने के लिए गांवों में 663 शिविर लगाए गए। इन शिविरों में 15 हजार 180 पशुओं का उपचार किया गया। वहीं, पशुपालकों के घर जाकर भी उपचार और टीकाकरण की सुविधा दी गई, जिसके तहत 4,603 पशुओं को उपचार/टीकाकरण दिया गया।
विभाग के अनुसार अब तक 1,151 बीमार पशुओं की पहचान हुई है, जिनमें से 942 पशु स्वस्थ हो चुके हैं। बीमारी की जांच के लिए 466 पशुओं के ब्लड सैंपल लिए गए। इनमें से 198 सैंपल की रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है, जिनमें 135 निगेटिव और 63 पॉजिटिव पाए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक अब तक प्रदेश में लंपी बीमारी से एक पशु की मृत्यु हुई है। जबकि वर्ष 2022 में लंपी बीमारी के दौरान प्रदेश में 786 पशुओं की मौत हुई थी। विभाग ने बताया कि अधिकारियों, कर्मचारियों, पैरावेट, मैत्री संगठन और पशु सखी के सहयोग से चलाए जा रहे टीकाकरण और उपचार अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में अधिकारी करेंगे दौरा
पशुपालन मंत्री ने अधिकारियों को सभी जिलों में लंपी बीमारी की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बीमारी की रोकथाम के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाएं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी और उपचार की प्रभावी व्यवस्था करने के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करने के निर्देश भी दिए गए। सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में पशुपालन विभाग की योजनाओं को पारदर्शी तरीके से लागू करने और उनकी जानकारी अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में सचिव पशुपालन, अपर सचिव पशुपालन, निदेशक पशुपालन, अपर निदेशक/मुख्य अधिशासी अधिकारी यूएलडीबी सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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